शासन, निदेशालय और मदरसा बोर्ड के आदेशों को नहीं मानते अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी! विभाग बेलगाम, जांच और आदेश फाइलों में कैद
*लखनऊ।* उत्तर प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में शासन और निदेशालय के आदेशों की खुलेआम अनदेखी किए जाने के आरोप एक बार फिर चर्चा में हैं। विभाग के जिला स्तर से लेकर निदेशालय तक तैनात अधिकारियों पर यह सवाल उठ रहा है कि जब उच्चाधिकारियों के स्पष्ट निर्देशों का भी पालन नहीं हो रहा, तो विभागीय अनुशासन और जवाबदेही आखिर किसके भरोसे है?
सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में शासन, निदेशालय और उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद के रजिस्ट्रार द्वारा कई महत्वपूर्ण आदेश जारी किए गए, लेकिन उनका पालन अपेक्षित स्तर पर नहीं हो सका। नतीजा यह रहा कि कई मामलों में विभाग को उच्च स्तर पर असहज स्थिति का सामना करना पड़ा।
सबसे अधिक चर्चा कोविड-19 लॉकडाउन अवधि में हुई कथित अवैध नियुक्तियों के विवरण को लेकर रही। शासन स्तर से कई बार जानकारी मांगे जाने के बावजूद अनेक जिलों से समय पर पूर्ण विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया। इसी प्रकार मदरसा शिक्षकों के वीआरएस (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति) संबंधी आंकड़ों की मांग भी लंबे समय तक अधूरी बनी रही।
हाल ही में शासन द्वारा समस्त मदरसों में शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्रों की आधार आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति लागू करने के निर्देश जारी किए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर इन आदेशों के अनुपालन की गति बेहद धीमी बताई जा रही है। कई जिलों में अब तक व्यवस्था पूरी तरह लागू नहीं हो सकी है।
स्थिति केवल आदेशों तक सीमित नहीं है। विभागीय जांचों का भी यही हाल बताया जा रहा है। विभिन्न शिकायतों और अनियमितताओं की जांच के लिए गठित समितियों को समयबद्ध रिपोर्ट देने के निर्देश दिए जाते हैं, लेकिन अधिकांश मामलों में जांच निर्धारित समय सीमा में पूरी नहीं हो पाती। कई जांचें महीनों तक लंबित रहती हैं, जबकि संबंधित पक्ष कार्रवाई का इंतजार करते रहते हैं।
प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि यदि शासन और निदेशालय के आदेशों का समयबद्ध पालन सुनिश्चित नहीं किया गया, तो इससे विभाग की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता दोनों पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगेंगे। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब विभाग के अधिकारी अपने ही उच्चाधिकारियों के आदेशों को गंभीरता से नहीं लेते, तो जवाबदेही किसकी तय होगी ?
अब निगाहें इस बात पर हैं कि शासन इन लगातार उठ रहे सवालों और आदेशों की कथित अवहेलना पर क्या रुख अपनाता है। यदि समय रहते जवाबदेही तय नहीं हुई, तो विभाग की कार्यशैली पर उठ रहे सवाल और भी गंभीर हो सकते हैं।

