सौ सोनार की एक लोहार की – यूपी मदरसा बोर्ड को क्यों न भंग कर दिया जाए ? दो सप्ताह में दाखिल करें रिपोर्ट : NHRC
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सौ सोनार की एक लोहार की – यूपी मदरसा बोर्ड को क्यों न भंग कर दिया जाए ? दो सप्ताह में दाखिल करें रिपोर्ट : NHRC

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के राज्य-वित्तपोषित मदरसों में कथित घोटाले, अनियमितताएं और संदिग्ध गतिविधियों को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है। आयोग ने अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ विभाग, उत्तर प्रदेश को कड़ी फटकार लगाते हुए दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। रिपोर्ट न देने की स्थिति में NHRC ने सिविल कोर्ट की शक्तियों के प्रयोग की चेतावनी दी है।

यह मामला बाराबंकी निवासी मानवाधिकार कार्यकर्ता इंजीनियर मोहम्मद तलहा अंसारी द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत से जुड़ा है, जिसमें राज्य के मदरसा तंत्र में गंभीर अनियमितताओं और संभावित राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों के आरोप लगाए गए हैं।

ATS जांच के गंभीर संकेत, सरकारी संरक्षण के आरोप

शिकायत में दावा किया गया है कि:

एक राज्य-वित्तपोषित मदरसे का शिक्षक ATS जांच में दोषी पाया गया,
उसे बचाने और संरक्षण देने वाले कई मदरसा अधिकारियों को निलंबित किया गया,इसके बावजूद कई मदरसे बिना पंजीकरण, ऑडिट और टैक्स अनुपालन के सरकारी अनुदान ले रहे हैं, जिसमें सरकारी धन के दुरुपयोग और सिस्टमेटिक संरक्षण के संकेत सामने आए हैं।

NHRC ने माना – प्रथम दृष्टया मानवाधिकार उल्लंघन

NHRC ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि शिकायत में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया मानवाधिकार उल्लंघन की श्रेणी में आते हैं, विशेषकर छात्रों, समाज और सार्वजनिक हित से जुड़े मामलों में।

पहले नोटिस की अनदेखी, अब आखिरी मौका

आयोग ने बताया कि 27 नवंबर 2025 को ही अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया था, लेकिन विभाग ने अब तक कोई रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की।

इसी लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए आयोग ने कहा है कि:

“यदि तय समयसीमा में रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई, तो आयोग मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 13 के तहत अपने दमनकारी (Coercive) अधिकारों का प्रयोग करेगा।”

दो सप्ताह का समय

NHRC ने निर्देश दिया है कि पूरी और अतिरिक्त रिपोर्ट अनिवार्य रूप से दो सप्ताह में प्रस्तुत की जाए।

स्वतंत्र ऑडिट और मदरसा बोर्ड को भंग करने की मांग

शिकायतकर्ता ने मांग की है कि:

  1. सभी राज्य-वित्तपोषित मदरसों का स्वतंत्र और उच्चस्तरीय ऑडिट कराया जाए,
  2. अनियमित मदरसों की फंडिंग तत्काल रोकी जाए
  3. यूपी मदरसा शिक्षा परिषद को भंग कर पारदर्शी व्यवस्था लागू की जाए।

सियासी और प्रशासनिक हलकों में हलचल

NHRC के इस सख्त रुख के बाद यूपी सरकार, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग और मदरसा प्रशासन में हलचल तेज हो गई है। यह मामला आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति और प्रशासनिक जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा कर सकता है।

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