उत्तर प्रदेश

नियुक्तियों की भूख में नियमों की हत्या,मदरसा नियमावली को ताक पर रखकर बाँटा गया वीआरएस,पेंशन भी जारी

बाराबंकी। राज्यानुदानित मदरसों में नियमों की खुलेआम धज्जियाँ उड़ाकर स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) बाँटने का बड़ा घोटाला सामने आया है। चौंकाने वाली बात यह है कि मदरसा विनियमावली 2016 में VRS का कोई प्रावधान ही नहीं है इसके बावजूद जिले के कई मदरसों में शिक्षकों और कर्मचारियों को गैरकानूनी तरीके से वीआरएस देकर न केवल पेंशन स्वीकृत की गई बल्कि रिक्त पदों पर नई नियुक्तियाँ भी कर दी गईं।

सूत्रों के अनुसार यह पूरा खेल नई भर्तियों का रास्ता साफ करने के लिए रचा गया। मदरसा भर्ती प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की प्रतियोगी परीक्षा न होने का लाभ उठाते हुए प्रबंधन समितियों ने अपने रिश्तेदारों और चहेतों को भ्रष्टाचार के सहारे नियुक्तियाँ दे डालीं।

निदेशक के पत्र से खुला पिटारा

मामले की परतें तब खुलीं जब अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के निदेशक अंकित कुमार अग्रवाल ने मदरसा बोर्ड के रजिस्ट्रार एवं प्रदेश के सभी जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों को पत्र जारी कर नियमविरुद्ध दिए गए वीआरएस और स्वीकृत पेंशन पर सवाल खड़े करते हुए सभी जनपदों से विस्तृत सूचना तलब कर ली। इसके बाद पूरे मदरसा तंत्र में खलबली मच गई।

NHRC तक पहुँचा मामला, नोटिस से हड़कंप

मामला यहीं नहीं रुका। मदरसा सुधार आंदोलन के संयोजक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता सीनियर एवैल्युएशन इंजीनियर मो० तलहा अंसारी ने इस पूरे घोटाले की शिकायत राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC), भारत सरकार से कर दी। आयोग ने गंभीरता दिखाते हुए अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के निदेशक को नोटिस जारी कर दिया, जिससे विभागीय हलकों में हड़कंप मच गया है।

बाराबंकी भी घोटाले में शामिल

मदरसा वीआरएस घोटाले में बाराबंकी जनपद भी पीछे नहीं रहा। जिले में कई मामलों में नियमों को दरकिनार कर वीआरएस और पेंशन स्वीकृत की गई। प्रमुख नाम इस प्रकार हैं—

मदरसा मुईनुल इस्लाम, सुढियामऊ — क्लर्क मो० अनवार अंसारी
मदरसा मस्बाहुल उलूम, देवा — प्रधानाचार्य मो० फहीम
मदरसा मिस्बाहुल उलूम, देवा — शिक्षक जलालुद्दीन
मदरसा जामिया मदीनतुल उलूम, रसौली — कार्यवाहक प्रधानाचार्य मो० फारूक
मदरसा जामिया मदीनतुल उलूम, रसौली — शिक्षक मो० सईद

इन सभी को नियमों के विरुद्ध वीआरएस देकर पेंशन स्वीकृत की गई और खाली पदों पर नई नियुक्तियाँ भी कर ली गईं। यह मामला न केवल गंभीर वित्तीय अनियमितता का है, बल्कि विभागीय कार्यप्रणाली पर भी बड़ा सवालिया निशान लगाता है।

सबसे बड़ा सवाल

जब मदरसों का संचालन मदरसा विनियमावली 2016 के तहत होता है,
तो जिस नियम का उल्लेख ही विनियमावली में नहीं है, वह वीआरएस आखिर आया कहाँ से? क्या यह नियम मदरसा प्रबंधन ने गढ़ा या विभागीय अधिकारियों की मौन स्वीकृति से लागू हुआ?

कार्रवाई तय

फिलहाल पूरा अल्पसंख्यक कल्याण विभाग और मदरसा सिस्टम कटघरे में खड़ा है। सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) और निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण की जांच में कई अधिकारियों पर गाज गिरना लगभग तय माना जा रहा है।

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