नई दिल्ली। चलती हुई बसों में आग लगने से हो रही मौतों को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने बेहद सख़्त रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि ऐसी घटनाएँ भारत सरकार द्वारा निर्धारित सुरक्षा नियमों की खुली अवहेलना का परिणाम हैं और इसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
प्रियंक कानूनगो ने बताया कि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आयोग ने पहले ही सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को निर्देश जारी किए थे, साथ ही अनुपालन न करने पर सम्मन भी जारी किए गए। इसके बावजूद कई राज्यों की ओर से केवल औपचारिक और खानापूर्ति वाली रिपोर्ट्स भेजी गईं, जो गंभीर चिंता का विषय है।
ओडिशा सरकार की रिपोर्ट की सराहना
NHRC सदस्य प्रियंक कानूनगो ने ओडिशा सरकार द्वारा भेजी गई कार्रवाई रिपोर्ट को सबसे बेहतरीन और उदाहरणीय बताया। उन्होंने कहा कि इस रिपोर्ट का अवलोकन करने से यह साफ़ होता है कि यदि प्रशासन चाहे तो यात्रियों की जान बचाई जा सकती है।
ओडिशा सरकार ने स्लीपर बसों की व्यापक जांच करते हुए—
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1439 बसों को नोटिस
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538 बसों को “NOT TO BE TRANSACTED” घोषित
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341 बसों से अवैध ड्राइवर पार्टिशन हटाया
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23 बसों के फिटनेस सर्टिफिकेट रद्द
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सभी बसों में 10 किलो के अग्निशमन यंत्र सुनिश्चित किए
खानापूर्ति करने वाले राज्यों को चेतावनी
प्रियंक कानूनगो ने चेतावनी देते हुए कहा कि जिन राज्य सरकारों ने महज़ औपचारिक रिपोर्ट भेजी है, उनसे अपेक्षा है कि वे ओडिशा से सीख लेकर तुरंत सुधार करें। उन्होंने कहा कि यदि ऐसी रिपोर्ट्स सार्वजनिक की गईं तो जनता स्वयं तुलना करेगी, जिससे
नागरिकों के जीवन से कोई समझौता नहीं
NHRC सदस्य प्रियंक कानूनगो ने दोहराया कि
“नागरिकों का जीवन अनमोल है। किसी कीमत पर कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।”
उन्होंने जानकारी दी कि आयोग एक बार फिर पुनः नोटिस जारी कर रहा है, ताकि सभी राज्य सरकारें तत्काल प्रभाव से सुरक्षा नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करें।
गणतंत्र दिवस पर सुरक्षा की अपील
गणतंत्र दिवस के अवसर पर प्रियंक कानूनगो ने देशवासियों के लिए जन-जन की सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन की मंगलकामना व्यक्त की।