उत्तर प्रदेश

बज़्म-ए-ख़वातीन के तत्वावधान में “एक शाम जवानों के नाम” कार्यक्रम का आयोजन

लखनऊ। भारतीय सेना के स्थापना दिवस (आर्मी डे) के अवसर पर बज़्म-ए-ख़वातीन के तत्वावधान में शुक्रवार को अमीनाबाद स्थित ज़नाना पार्क में “एक शाम जवानों के नाम” शीर्षक से वैचारिक एवं साहित्यिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित कर की गई।

इस मौके पर बज़्म-ए-ख़वातीन की अध्यक्ष बेगम शहनाज़ सिदरत ने कहा कि कड़ाके की ठंड के बावजूद देशवासी शांति और सुकून से जीवन जी पा रहे हैं, तो इसका श्रेय भारतीय सेना को जाता है, जो शून्य से नीचे तापमान में भी सीमाओं पर मुस्तैदी से तैनात है। उन्होंने कहा कि भारत चारों ओर से चुनौतियों से घिरा है, लेकिन हमारे सैनिकों की वीरता, हौसले और अतुलनीय बलिदान के कारण कोई भी दुश्मन आँख उठाने की हिम्मत नहीं कर सकता।

बेगम सिदरत ने बांग्लादेश में हिंदुओं की मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि मॉब लिंचिंग चाहे कहीं भी हो, वह गलत है और इसकी कड़ी निंदा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हर प्राकृतिक आपदा और कठिन समय में सेना देशवासियों की मदद के लिए सबसे आगे खड़ी रहती है, जिसका जीवंत उदाहरण उत्तराखंड की प्राकृतिक आपदा के दौरान देखने को मिला।

आर्मी डे के अवसर पर बज़्म-ए-ख़वातीन यूथ विंग की बच्चियों—अफरोज़, अर्शिया बानो, रिज़वाना, समरीन, ज़ैनब और ज़िक्ऱा—ने देशभक्ति से ओतप्रोत तराने प्रस्तुत किए, जिन्हें उपस्थित दर्शकों ने खूब सराहा।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने जनता से सांप्रदायिकता, अफवाहों और सामाजिक माहौल बिगाड़ने वाली गतिविधियों से सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि उकसावे या गाली-गलौज की स्थिति में भी धैर्य और संयम बनाए रखना चाहिए। हमारी सदियों पुरानी गंगा-जमुनी तहज़ीब आपसी मेल-जोल और भाईचारे की प्रतीक है। मंदिरों और मस्जिदों से जुड़े मामलों के समाधान के लिए संविधान मौजूद है, इसलिए आपसी एकता, सभी धर्मों के सम्मान और मिल-जुलकर तरक्की की राह पर आगे बढ़ना चाहिए।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. रूबीना बेग (पूर्व आईएएस), श्रीमती बनर्जी (पूर्व आईपीएस), डॉ. सुधा मिश्रा, पीपा साइमन (इंग्लैंड), डॉ. असमा मलिक (दिल्ली), वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु मति सेन, कोरिया से केन चांग तथा प्रस्का हैमिल्टन शामिल रहीं। अतिथियों ने शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षा ही सामाजिक विकास, भेदभाव के उन्मूलन और महिलाओं की आत्मनिर्भरता का सशक्त माध्यम है।

इसके अलावा रिज़वाना मजीद, मेहर-उन-निसा, उज़मा सिद्दीकी, सफ़िया खातून (दिल्ली), साइमा खान और अनवर जहां सहित अन्य महिलाओं ने भी अपने विचार रखे और राष्ट्रीय एकता, आपसी भाईचारे तथा हिंदू-मुस्लिम एकता पर विशेष जोर दिया।

कार्यक्रम का संचालन नश्त हयातुल्लाह ने किया।

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